श्री हुणेश्वर-घण्डियाल-भैरव देवता मन्दिर सेवा समिति दांणियां धाम,ग्राम सभा मान्दरा बासर; पो०-केपार्स बासर जिला -टिहरी गढ़वाल (उत्तराखण्ड)

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Sunday, May 22, 2016

ना जी भर के देखा, ना कुछ बात की,






ना जी भर के देखा, ना कुछ बात की,
बड़ी आरजू थी, मुलाक़ात की।
करो दृष्टि अब तो प्रभु करुना की,
बड़ी आरजू थी, मुलाक़ात की॥

गए जब से मथुरा वो मोहन मुरारी,
सभी गोपिया बृज में व्याकुल थी भारी।
कहा दिन बिताया, कहाँ रात की,
बड़ी आरजू थी, मुलाक़ात की॥

चले आयो अब तो ओ प्यारे कन्हिया,
यह सूनी है कुंजन और व्याकुल है गैया।
सूना दो इन्हें अब तो  धुन मुरली की,
बड़ी आरजू थी, मुलाक़ात की॥

हम बैठे हैं कब से तेरे गम को  पाले,
भला ऐसे में खुद को कैसे संभाले।
ना उनकी सुनी और न  अपनी कही,
बड़ी आरजू थी, मुलाक़ात की॥

तेरा मुस्कुराना भला कैसे भूलें,
वो कदमन की छैया, वो सावन के झूले।
ना कोयल की कू कू, ना पपीहा की पी,
बड़ी आरजू थी, मुलाक़ात की॥

तमन्ना यही थी की आएंगे मोहन,
मैं वारुंगी उनपे ये तन मन यह जीवन॥
हाय मेरा यह कैसा बिगड़ा नसीब,
बड़ी आरजू थी, मुलाक़ात की॥

मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ .





मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ,
हे पावन परमेश्वर मेरे,मन ही मन शरमाऊँ ।
मैली चादर ओढ़ के कैसे...

तूने मुझको जग में भेजा निर्मल देकर काया,
आकर के संसार में मैंने इसको दाग लगाया ।
जनम जनम की मैली चादर,कैसे दाग छुड़ाऊं,
मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ ॥

निर्मल वाणी पाकर तुझसे नाम ना तेरा गाया,
नैन मूँदकर हे परमेश्वर कभी ना तुझको ध्याया ।
मन-वीणा की तारे टूटी,अब क्या राग सुनाऊँ,
मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ ॥

इन पैरों से चलकर तेरे मंदिर कभी ना आया,
जहाँ जहाँ हो पूजा तेरी,कभी ना शीश झुकाया ।
हे हरिहर मई हार के आया,अब क्या हार चढाउँ,
मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ ॥

तू है अपरम्पार दयालु सारा जगत संभाले,
जैसा भी हूँ मैं हूँ तेरा अपनी शरण लगाले ।
छोड़ के तेरा द्वारा दाता और कहीं नहीं जाऊं
मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ ॥

Thursday, May 19, 2016

कैलाश के निवासी नमों बार बार हूँ






कैलाश के निवासी नमों बार -बार हूँ,
आयो शरण तिहारी , भोले तार-तार तुम।
 कैलाश के निवासी .......................

            भक्तों को कभी शिव तूने  निराश न किया,
             माँगा उन्हें जो चाहा बरदान दे दिया,
            बड़ा ही तेरा दायजा, बड़े दातार तुम,
            आयो शरण तिहारी ,भोले तार तार तुम।


                बखान क्या करूँ मैं राखों के ढेर का,
                 तपती भभूत में है,खजाना कुबेर का,
                  है गंग धार ,मुक्तिद्वार ,औंकार तुम,
                   आयो शरण तिहारी , भोले तार-तार तुम।

                  क्या -क्या नहीं दिया , हम क्या प्रमाण दें,
                   बस गये हैं त्रिलोक, शंभू तेरे दान से,
                  ज़हर पिया,जीवन दिया,कितने उदार तुम,
                 आयो शरण तिहारी भोले तार-तार तुम।

                  तेरी कृपा बिना न हिले, एक भी अणु,
                   लेते हैं श्वास तेरी दया से तनू -तनू,
                   कहे दास एक बार ,मुझको निहारो तुम,
                  आयो शरण तिहारी, भोले तार-तार तुम। 
                   कैलाश के निवासी, नमो नमो बार- बार हूँ,
                 आयो शरण तिहारी..............................

चलो देख आएं नन्द घर लाला हुआ।

चलो देख आएं नन्द घर लाला हुआ।
यह तो नन्द जी के कुल का उजाला हुआ॥

देखो सब ग्वाल बाल, चले होके खुशिहाल,
संग बईया गल डाल, नाचे दे दे के ताल।
सब मिलझुल कहें गोप ग्वाला हुआ,
चलो देख आएं नन्द घर लाला हुआ॥

बाजे शंख घड़ेयाल, जनम लीनो गोपाल,
सखी ब्रिज में सब ग्वाल, कहें जय जय गोपाल।
झूले अंगना में पलना है डाला हुआ,
चलो देख आएं नन्द घर लाला हुआ॥

प्रगटे बृज में बृजराज, करने भक्तों के काज,
आया सारा समाज, दर्शन करने को आज।
सुख नैनो को पहुचाने वाला हुआ,
चलो देख आएं नन्द घर लाला हुआ॥

देखो गोकुल की और, कैसे नाच रहे मोर,
छाए बादल घनघोर, बोले पची करे छोर।
बर्षा आनंद की बरसाने वाला हुआ,
चलो देख आएं नन्द घर लाला हुआ॥

देना हो तो दीजिए जनम जनम का साथ ।



देना हो तो दीजिए जनम जनम का साथ ।
अब तो कृपा कर दीजिए, जनम जनम का साथ ।
मेरे सर पर रख बनवारी अपने दोनों यह हाथ ॥

देने वाले श्याम प्रभु से धन और दौलत क्या मांगे ।
श्याम प्रभु से मांगे तो फिर नाम और इज्ज़त क्या मांगे ।
मेरे जीवन में अब कर दे तू कृपा की बरसात ॥

श्याम तेरे चरणों की धूलि धन दौलत से महंगी है ।
एक नज़र कृपा की बाबा नाम इज्ज़त से महंगी है ।
मेरे दिल की तम्मना यही है, करूँ सेवा तेरी दिन रात ॥

झुलस रहें है गम की धुप में, प्यार की छईया कर दे तू ।
बिन माझी के नाव चले ना, अब पतवार पकड़ ले तू ।
मेरा रास्ता रौशन कर दे, छायी अन्धिआरी रात ॥

सुना है हमने शरणागत को अपने गले लगाते हो ।
ऐसा हमने क्या माँगा जो देने से घबराते हो ।
चाहे जैसे रख बनवारी, बस होती रहे मुलाक़ात ॥

भभूती रमाये बाबा भोले नाथ आए





भभूती रमाये बाबा भोले नाथ आए
भोले नाथ आए बाबा डमरू बजाए
भोले नाथ आए बाबा अलख जगाए

सखी एक बोली मैया बाहर पधारो 
आयो एक बाबो दिखे बड़ो मतवारो
भिक्षा देयीके कहदो आसन पधारो 
भभूती रमाये बाबा भोले नाथ आए

भरी थार कंचन को मैया सिधारी
नमन करीके मैया वचन उचारी
आशीष दीजै बाबा सुखी भये मुरारी
भभूती रमाये बाबा भोले नाथ आए

बोले भोले बाबा मैया आशीष लीजै
किन्तु एक हेतु मैया सिद्ध करीजै
लायी के लाल मैया हाथ धरीजै
भभूती रमाये बाबा भोले नाथ आए

किस से नज़र मिलाऊँ तुम्हे देखने के बाद





किस से नज़र मिलाऊँ तुम्हे देखने के बाद
आँखों में ताबे दीद अब बाकी नहीं रहा
किससे नज़र मिलाऊँ तुम्हे देखने के बाद...
सारे देवतों का एहतराम भी मेरी निगाह में है
किस किस को सर झुकाऊं, तुम्हे देखने के बाद
किससे नज़र मिलाऊँ तुम्हे देखने के बाद...
है लुत्फ़ बस इसी में मज़ा इसी में है
अपना पता ना पाऊं, तुम्हे देखने के बाद
किससे नज़र मिलाऊँ तुम्हे देखने के बाद...
मेरा एक तू ही तू है दिलदार प्यारे काहना
झोली कहां फैलाऊँ, तुम्हे देखने के बाद
किससे नज़र मिलाऊँ तुम्हे देखने के बाद...
प्यारे यह प्यार तेरा महफ़िल में खींच लाया
महबूब प्यार तेरा महफ़िल में खींच लाया
दिलबर यह प्यार तेरा महफ़िल में खींच लाया
दिल की किसे सुनाऊं, तुम्हे देखने के बाद
किससे नज़र मिलाऊँ तुम्हे देखने के बाद...
साहिल पे रुक ना जाऊं, तुम्हे देखने के बाद
सागर में डूब जाऊं, तुम्हे देखने के बाद

नी मैं नचना मोहन दे नाल आज मैनु नच लेन दे॥




नी मैं नचना मोहन दे नाल आज मैनु नच लेन दे॥


१, दुनिया तो मैं नचैया बथेरा, फिर भी ना कोई बनया मेरा
नी मैं की करना संसार आज मैनु नच लेन दे,
नी मैं नचना मोहन दे नाल आज मैनु नच लेन दे॥

२, हुन मैं किसी कोलो नहीं डरना, जो मन आये सो मैं करना
मेरा मुरली वाला यार, आज मैनु नच लेन दे॥
नी मैं नचना मोहन दे नाल आज मैनु नच लेन दे॥

३, पैरा दे विच घुँघरू बनके, अपने श्याम दी जोगन बन के,,
अखां ला लईया उसदे नाल, आज मैनु नच लेन दे,
नी मैं नचना मोहन दे नाल आज मैनु नच लेन दे॥

४, वृंदावन विच जावांगी मैं भी,वृंदावन विच जावांगी मैं भी,
प्यार मोहन दा पावगी मैं भी, प्यार मोहन दा पावगी मैं भी,
जग रुसजाये लख बार, आज मैनु नच लेन दे,
नी मैं नचना मोहन दे नाल आज मैनु नच लेन दे॥

Tuesday, May 17, 2016

चल पड़ा शिव का पुजारी शिव को मनाने के लिए

चल पड़ा शिव का पुजारी शिव को मनाने के लिए
हाथ में गंगा जल गडवा शिव को चढाने के लिए

बैठ गया शिवलिंग के आगे, करने लगा स्तुतीयाँ
हाथ जब ऊपर उठाया, घंटा बजाने के लिए

देख कर सोने का घंटा, पाप मन में आ गया
हो गया तैयार वह तो घंटा चुराने के लिए

चढ़ गया शिवलिंग के ऊपर घंटा ले जाने के लिए
हो गए प्रगट शंभू दर्शन दिखाने के लिए

जल चढाते हैं सभी मुझ को मनाने के लिए
तू तो खुद ही चढ़ गया मुझ को रिझाने के लिए

मेरे बांके बिहारी लाल, तू इतना ना करिओ श्रृंगार,नज़र तोहे लग जाएगी।


मेरे बांके बिहारी लाल, तू इतना ना करिओ श्रृंगार,
नज़र तोहे लग जाएगी।

तेरी सुरतिया पे मन मोरा अटका।
प्यारा लागे तेरा पीला पटका।
तेरी टेढ़ी मेढ़ी चाल, तू इतना ना करिओ श्रृंगार,
नज़र तोहे लग जाएगी॥


तेरी मुरलिया पे मन मेरा अटका।
प्यारा लागे तेरा नीला पटका।
तेरे गुंगार वाले बाल, तू इतना ना करिओ श्रृंगार,
नज़र तोहे लग जाएगी॥

तेरी कमरिया पे मन मोरा अटका।
प्यारा लागे तेरा काला पटका।
तेरे गल में वैजयंती माल, तू इतना ना करिओ श्रृंगार,
नज़र तोहे लग जाएगी॥

मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई,

पीले पीले यह रास मीठा है राम का,
   जो रस पीने से जुबा पे नाम हो घनश्याम का ।
   तू पी तेरी दुनिया लुटा के पी, मस्ती में आके पी, 
   इस से जयादा शौंक है तो गुरु के शरण में जा के पी ।
   तेरा जब निकल जायेगा जी तो फिर कौन कहेगा पी ॥

मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई,
जहाँ मेरे अपने सिवा कुछ नहीं है l
  
पता जब लगा मेरी हस्ती का मुझको,
सिवा मेरे अपने कहीं कुछ नही है ।
मुझे मेरी मस्ती कहाँ ले के आई...

सभी में सभी में फकत मैं ही मैं हूँ,
सिवा मेरे अपने कहीं कुछ नही है ।
मुझे  मेरी मस्ती  कहँ ले के आई...

ना दुःख है ना सुख है ना शोक है कुछ भी,
अजब है यह मस्ती पीया कुछ नहीं है
मुझे  मेरी मस्ती  कहँ ले के आई...

अरे मैं हूँ आनंद आनंद मेरा
मस्ती ही मस्ती और कुछ नहीं है
मुझे  मेरी मस्ती  कहँ ले के आई...

भ्रम है द्वन्द है जो तुमको हुआ है
हटाया जो उसको खदफा कुछ नहीं है
मुझे  मेरी मस्ती  कहँ ले के आई...

कभी कभी भगवान् को भी भक्तों से काम पड़े


कभी कभी भगवान् को भी भक्तों से काम पड़े ।
जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़े ॥

अवध छोड़ प्रभु वन को धाये,
सिया राम लखन गंगा तट आये ।
केवट मन ही मन हर्षाये,
घर बैठे प्रभु दर्शन पाए ।
हाथ जोड़ कर प्रभु के आगे, केवट मगन खड़े ॥
जाना था गंगा पार प्रभु.................

प्रभु बोले तुम नाव चलाओ,
अरे पार हमे केवट पहुँचाओ ।
केवट बोला सुनो हमारी,
चरण धूल की माया भारी
मैं गरीब हूँ  नैया मेरी, नारी ना होए पड़े ॥
जाना था गंगा पार प्रभु.................

केवट दोड़ के जल भर ले आया,
चरण धोये चरणामृत पाया ।
वेद ग्रन्थ जिन के गुण गाये,
केवट उनको नाव चढ़ाए ।
बरसे फूल गगन से ऐसे,भक्त के भाग्य जगे ॥ 
जाना था गंगा पार प्रभु.................

चली नाव गंगा की धारा,
सिया राम लखन को पार उतारा ।
प्रभु देने लगे नाव उतराई,
केवट कहे नहीं रघुराई ।
पार किया मैंने तुमको, अब तू मोहे पार करे ॥
जाना था गंगा पार प्रभु.................

कभी कभी भगवान् को भी भक्तों से काम पड़े ।
जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़े ॥

मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है

मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है
करते हो तुम कन्हैया , मेरा नाम हो रहा है

पटवार के बिना ही मेरी नाव चल रही है
बिन मांगे मेरे कन्हैया  हर चीज मिल रही है
हर वार दुश्मनो का नाकाम हो रहा है
मेरा आपकी कृपा से...

मेरी जिंदगी में तुम हो, किस बात की कमी है
मुझे और अब किसी की परवाह भी नहीं है
तेरी बदौलतों से सब काम हो रहा है
मेरा आपकी कृपा से...

दुनिया में होंगे लाखों, तेरे जैसा कौन होगा
तुझ जैसा बंदापरवर भला ऐसा कौन होगा
तेरे नाम का ही सुमिरन, आराम दे रहा है
मेरा आपकी कृपा से...

मोहे लागी लगन गुरु चरणन की |

मोहे लागी लगन गुरु चरणन की |

चरण बिना मुझे कुछ नहीं भाये,
जग माया सब स्वपनन की |

भव सागर सब सूख गया है,
फिकर नही मोहे तरनन की |

आत्म ज्ञान दियो मेरे सतगुरु,
पीड़ा मिटी भव मरनन की |

मीरा के प्रभु गिरिधर नागर,
चेरी भई गुरु चरणन की |

मुकुट सिर मोर का, मेरे चित चोर का ।


मुकुट सिर मोर का, मेरे चित चोर का ।
दो नैना सरकार के, कटीले हैं कटार से ॥

कमल लज्जाये तेरे नैनो को देख के ।
भूली घटाए तेरी कजरे की रेख पे ।
यह मुखड़ा निहार के, सो चाँद गए हार के,
दो नैना सरकार के, कटीले हैं कटार से ॥

कुर्बान जाऊं तेरी बांकी अदाओं पे ।
पास मेरे आजा तोहे  भर लूँ मैं बाहों में ।
जमाने को विसार के, दिलो जान टोपे वार के,
दो नैना सरकार के, कटीले हैं कटार से ॥

रमण बिहारी नहीं तुलना नहीं तुम्हारी ।
तुझ सा ना पहले कोई ना देखा अगाडी ।
दीवानों ने विचार के, कहा यह पुकार के,
दो नैना सरकार के, कटीले हैं कटार से ॥

Tuesday, May 3, 2016

निर्माणाधीन मन्दिर


मन्दिर निर्माण का कार्य प्रगति पर

 मन्दिर निर्माण का पुश्ता कार्य प्रगति पर



चाय का इन्तजार करते हुए  सब लोग 




 सड़क निर्माण का कार्य प्रगति पर

 मन्द्रगाड से मन्दिर तक जाने के लिए सड़क निर्माण शुरू

देव कृपा से निर्माण कार्य प्रगति पर