श्री गंगु रमोला माता मैनावती ओर सिदुआ बिदुआ रमोला
एक बार भगवान कृष्ण को सपने मे ज्योत्रमाला दिखती है जो बला की खुबसूरत है .वहा भुटानी राजा भुपू नाग के रिश्तेदार की बेटी है.उसकी शादी की एक शर्त होती है कि जो उसे चोसर मै हरायेगा वो उसी से शादी करेगी।
उस समय गढवाल के एक हिस्से मे कोंला वंश का राज था उनके राजकुमार थे 9भाई कोंला. सुरज कोंला. बर्ह्मी कोंला. इत्यादि ओर बहिन थी विजोरा. जो कृष्ण के बुआ के लड़के थे. कृष्ण का आदेश होता बर्ह्मी कोंला के लिए कि वो भुटान जायं ओर उनके लिए ज्योत्रमाला को जीत के लाये. बर्ह्मी कोंला कृष्ण का आदेश मानते हुए जब तैयार होता है तो उनकी मां जिया माता पुछती है कहां जा रहे हो तब वो कृष्ण का आदेश सुनाते हैं.जिया माता मना करती हैं कि वो वहां न जाय वंहा लोग बड़े खुंखार होते हैं ओर भुपू नाग भी बहुत खतरनाक राजा है।
मां को समझा के जिया माता के हाथ में दो फुल देता है ओर कहता है कि ये फुल कभी नहीं मुरझायेंगे. जब ये फुल मुरझाने लगेंगे तब समझना कि तेरा बेटा अब खतरे में है.
वंहा से बर्ह्मी कोंला भूटान पंहुच कर ज्योत्रमाला से मिलता है ओर उसकी शर्त अनुसार शादी का प्रश्ताव रखता है. उसके बाद दोनों में खेल शुरू हो जाता है जिसमें बर्ह्मी कोंला हारने लगता है।
भंवरों से जिया माता का रैवार सुनकर सिदुआ भेड बकरियों को बिदुआ के हवाले कर अपनी मोरपंखी घोडी मे बैठ कर भूटान रवाना हो जाता
भूटान पंहुच कर सबसे पहले ज्योत्रमाला से मिलते हैं. ज्योत्रमाला से पता लेकर भुपू नाग के गांव मे पंहुचते. वंहा पंहुच कर 9 खारी तम्बाकू का पतबीड़ा बनाके जब सुटा मारते हैं तो भुपू नाग के पूरे गांव मे कोहरा छा जाता. धुएं सै तिलमिला कर सारे नाग ओर सांप बहार आ जाते हैं
फिर भुपू नाग ओर उसकी सेना सिदुआ कै साथ भिड़ जातीहै. जिसमै भुपू नाग ओर उसकी सेना मारी जाती है. फिर नागणियों से बर्ह्मी कोंला के बारे मैं पुछते हैं
नमक की खारी बर्ह्मी को लाते ओर अपनी वोक्सयाड़ी विद्या से बर्ह्मी को ठीक करते हैं।
हारने का कारण उस जगह पे जो बैठेगा वही जितेगा.फिर बर्ह्मी कोंला उसको बताता कि उससे वो नहीं कृष्ण शादी करेंगे. दो बार के छल से तिलमिला जाती ज्योत्रमाला .बदला लेने के लिए बर्ह्मी कोंला को अपनी बातों में फसा कर भुपू नाग की बेटी पत्रमाला से शादी करने को भेज देती. जंहा उसकी लड़ाई भुपू नाग से होती ओर घायल होकर बेहोश हो जाता. भुपू नाग बर्ह्मी को उठा कर नमक की खारी मैं फेंक दिया. जैसे बर्ह्मी कोंला की लड़ाई भुपू नाग से शुरू होती वेसे ही वो फुल मुरझाने लगते ओर फुलों को देख के जिया माता चिन्तित हो जाती ओर सोचती कि अब उसके लाल को कोन बचा कर लायेगा. काफी सोचने के बाद जिया माता के दिमाग में एक ही नाम आता सिदुआ रमोला जो उस समय गढवाल का महान वीर योद्धा था जो साथ मे तन्त्र शाश्त्र का भी ग्याता था .तब जिया माता भंवरे भेजती सिदुआ के पास ओर कहती कि यदि आप मेरे बेटे को लेकर आओगे तो मैं अपनी बेटी बिजोरा की शादी तुमसे कराउंगी .
भंवरे पहले रमोली जाते जहाँ उन्हें सिदुआ नहीं मिलते. फिर भंवरे भाभर जाते जहाँ सिदुआ अपनी भेड बकरियों के साथ होतें है.सिदुआ को देख कर भंवरे उनके पास मंडराने लगते .उन्हें देखकर सिदुआ कहतें हैं कि दुश्मनों के भेजे हैं तो बाहों मे बैठो किसी बहिन ने भेजे तो कलाई मे बैठो यदि मां ने भेजे तो गोद में बैठो. भंवरे सिदुआ की गोद में बैठ जाते हैं।
बर्ह्मी कोंला कुछ सोच कर उससे पानी मांगता है वो दासी को बुलाती .तब बर्ह्मी कोंला बोलता वो खुद अपने आप पानी लाये फिर ज्योत्रमाला पानी लेने चली जाती .जब तक वो पानी लेके आती है तब तक बर्ह्मी कोंला जगह बदल कर उसकी जगह पर बैठ जाता है .ज्योत्रमाला पानी लाकर उसे पिलाती ओर कहती कि वो उसकी जगह से उठ जाये.बर्ह्मी कोंला उठने को मना करता ओर कहता कि वो यहीं से खेलेगा यदि तुझको खेलना है तो उस जगह पर बैठ कर खेल नहीं तो हार मान जा. फिर ज्योत्रमाला वहीं बैठ कर खेलने लगती ओर हार जाती।
सिदुआ रमोला वहाँ से बर्ह्मी कोंला. पत्रमाला ओर ज्योत्रमाला को लेके द्वारका पंहुचते ओर ज्योत्रमाला को कृष्ण के पास छोड़ कर गढवाल आ जाते .जहाँ बर्ह्मी कोंला की शादी पत्रमाला से होती ओर सिदुआ रमोला की शादी कोंलों की बहिन विजोरा से होती है

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