स्व०श्री बच्ची राम भट्ट जी का जन्म 28 फरबरी 1946 दिन वीरवार (१७ गते चैत्र मासे सम्वत २००२)को ग्राम मान्दरा बासर जिला टिहरी गढ़वाल (उत्तराखण्ड ) में ब्राह्मण भट्ट परिवार में पिताजी स्व० श्री घनानन्द भट्ट व माता स्व० श्रीमती चन्द्रमा देवी के घर में हुआ ! बालक बचपन से ही शान्त स्वभाव और मिलनसार होने के कारण सभी ग्राम वासियों के दिलों में छा गया !गाँव का कोई भी व्यक्ति किसी काम के लिए कहता तो बालक उस काम को तुरंत कर लेता !बचपन से ही बालक का मन पढाई में कम और खेती के काम में ज्यादा लगता था और पशुओं की सेवा में अधिक समय दिया करते थे !जवानी की दहलीज पर पहुँचते ही माता-पिता ने आपका विवाह कर दिया लेकिन विवाह के ८,१० सालों के बाद आपके घर ३० जुलाई १९८४ को एक पुत्री ने जन्म लिया पुत्री के जन्म के बाद घर में ख़ुशी का माहोल था कि पुत्री जन्म के ठीक 2 महीने वाद ही अचानक 2 अक्टूबर 1984 को प्रातः आप अपने परिवार और गाँव को रोता बिलखता छोड़कर मात्र ३८ वर्ष की छोटी सी उम्र में प्रभु चरणों के प्रेमी हो गए !बस छोड़ गए अपनी यादें लेकिन जो काम वो अधूरा छोड़ गए थे वो काम उनकी मृत्यु के कुछ वर्षो के वाद उन्होंने पित्र देवता के रूप में आज भी कर रहे है ! उनके मन्दिर में हर निराश व्यक्ति खुश होकर लौटता है पित्र देवता का मन्दिर छोटा सा गाँव के ऊपर दांणियां धाम में है और अब नयाँ और बड़ा मन्दिर दांणियां के नीचे सड़क पर बना हुआ है ॥ आप सभी लोग पित्र दर्शन के लिए आयें और अपनी मनोकामना पूर्ण करें !पित्र देवता का आशीर्वाद हम सब पर बना रहे॥ जय पित्र देवता ॥
दांणियां धाम ग्राम सभा मान्दरा बासर पोस्ट ऑफिस-केपार्स बासर जिला-टिहरी गढ़वाल (उत्तराखण्ड)
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Saturday, March 5, 2016
पित्र देवता स्व० श्री बच्ची राम भट्ट जी का जीवन परिचय और उनके मन्दिर व मूर्ति की फोटो
स्व०श्री बच्ची राम भट्ट जी का जन्म 28 फरबरी 1946 दिन वीरवार (१७ गते चैत्र मासे सम्वत २००२)को ग्राम मान्दरा बासर जिला टिहरी गढ़वाल (उत्तराखण्ड ) में ब्राह्मण भट्ट परिवार में पिताजी स्व० श्री घनानन्द भट्ट व माता स्व० श्रीमती चन्द्रमा देवी के घर में हुआ ! बालक बचपन से ही शान्त स्वभाव और मिलनसार होने के कारण सभी ग्राम वासियों के दिलों में छा गया !गाँव का कोई भी व्यक्ति किसी काम के लिए कहता तो बालक उस काम को तुरंत कर लेता !बचपन से ही बालक का मन पढाई में कम और खेती के काम में ज्यादा लगता था और पशुओं की सेवा में अधिक समय दिया करते थे !जवानी की दहलीज पर पहुँचते ही माता-पिता ने आपका विवाह कर दिया लेकिन विवाह के ८,१० सालों के बाद आपके घर ३० जुलाई १९८४ को एक पुत्री ने जन्म लिया पुत्री के जन्म के बाद घर में ख़ुशी का माहोल था कि पुत्री जन्म के ठीक 2 महीने वाद ही अचानक 2 अक्टूबर 1984 को प्रातः आप अपने परिवार और गाँव को रोता बिलखता छोड़कर मात्र ३८ वर्ष की छोटी सी उम्र में प्रभु चरणों के प्रेमी हो गए !बस छोड़ गए अपनी यादें लेकिन जो काम वो अधूरा छोड़ गए थे वो काम उनकी मृत्यु के कुछ वर्षो के वाद उन्होंने पित्र देवता के रूप में आज भी कर रहे है ! उनके मन्दिर में हर निराश व्यक्ति खुश होकर लौटता है पित्र देवता का मन्दिर छोटा सा गाँव के ऊपर दांणियां धाम में है और अब नयाँ और बड़ा मन्दिर दांणियां के नीचे सड़क पर बना हुआ है ॥ आप सभी लोग पित्र दर्शन के लिए आयें और अपनी मनोकामना पूर्ण करें !पित्र देवता का आशीर्वाद हम सब पर बना रहे॥ जय पित्र देवता ॥
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